ॐ कार बिन्दु संयुक्तं नित्यं ध्यायन्ति योगिनः |
कामदं मोक्षदं चैव ओंकाराय नमो नमः ||
अर्थात् सभी योगी बिन्दु युक्त ॐ का ध्यान करते हैं
कामनाओं पूर्ण करने वाले
और मोक्ष को देने वाले ॐ को मेरा नमस्कार |
ॐ भूर्भुवः स्व: तत् सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य
धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।।
धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।।
मेरा प्रश्न है कि सभी मन्त्रों का प्रारम्भ ॐ से ही क्यों होता है ? डकार लेते समय अनायास ही
मुख से ॐ क्यों निकलता है ? ॐ में इतनी सकारात्मक ऊर्जा क्यों ?
वास्तव में ॐ साधारण शब्द नहीं है, ऋषिओं से प्राप्त यह एक ऐसी पावन ध्वनि है जो उन्होंने कठोर तप के दौरान परा की निरपेक्ष अवस्था पहुंचकर अनुभूत की थी । वेद-मन्त्रों का साक्षात्कार भी इसी अवस्था में हुआ । ओंकार के दो भेद हैं- 1 वर्णात्मक 2 ध्वन्यात्मक
वर्णात्मक के अनुसार यह तीन अक्षरों अ उ म से मिलकर बना है ।विद्वान् इनका अर्थ कुछ इस
तरह करते हैं कि अ से आचरण उ से उच्चारण म से मनन अर्थात यदि इनको व्यवहार में लायेंगे
तो इस दैवीय ध्वनि का पूर्ण लाभ प्राप्त कर सकते हैं ।
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